ब्रेक्जिट के बाद ब्रिटेन आने के लिए ईयू आगंतुकों को भी लेना होगा ई-वीजा

सत्तारूढ़ कंजरवेटिव पार्टी ने कहा है कि ब्रेक्जिट के बाद ब्रिटेन आने के लिए यूरोपीय यूनियन (EU) के लोगों को भी पहले इलेक्ट्रॉनिक मंजूरी लेनी होगी। वर्तमान में यूरोपीय देशों के नागरिकों को ब्रिटेन में प्रवेश के लिए सिर्फ पहचान पत्र की आवश्यकता होती है। कंजरवेटिव पार्टी द्वारा प्रस्तावित नियमों के तहत अब यात्रा से पहले यूरोपीय आंगतुकों को न केवल पासपोर्ट लेना होगा बल्कि उन्हें ऑनलाइन फार्म भी भरना होगा।

इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल अथॉराइजेशन सिस्टम किया जाएगा शुरू

ब्रिटेन की गृह मंत्री प्रीति पटेल ने रविवार को यहां कहा, जब लोगों ने 2016 में ब्रेक्जिट के लिए मतदान किया था तो उन्होंने सीमाओं का नियंत्रण वापस लेने के लिए भी वोट दिया था। ब्रेक्जिट के बाद हम ऑस्ट्रेलियाई शैली के तहत अंकों पर आधारित आव्रजन प्रणाली शुरू करेंगे और ब्रिटेन की सुरक्षा को मजबूत करने के बारे में कदम उठाएंगे। वीजा के बिना आने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल अथॉराइजेशन (ETA) सिस्टम शुरू किया जाएगा। इस प्रणाली में आगंतुक अपना विवरण ऑनलाइन भर सकेंगे। प्रस्तावित नियमों के तहत आंगतुकों को अपने आपराधिक इतिहास के साथ ही बायोमीट्रिक डाटा भी देना होगा।

अगर यह नए नियम लागू होते हैं तो ब्रिटेन में प्रवेश के लिए यूरोपीय आइडी-कार्ड मान्य नहीं होंगे। कंजरवेटिव पार्टी का यह एलान विपक्षी लेबर पार्टी के प्रमुख नेता जेरेमी कॉर्बिन के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यूरोपीय लोगों के प्रवेश पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाना संभव नहीं होगा क्योंकि ब्रिटेन और यूरोप के लोगों के बीच पारिवारिक संबंध हैं।ब्रिटेन के राजनीतिक दलों के प्रमुख नेता ब्रेक्जिट, राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा और आतंकवाद पर बनाए जाने वाले कानूनों को लेकर टीवी बहस में भिड़ गए। आइटीवी पर आयोजित बहस में सत्तारूढ़ कंजरवेटिव पार्टी के ऋषि सुनक ने जहां ब्रेक्जिट पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया वहीं लेबर पार्टी के सचिव रिचर्ड बर्गन ने अपने नेता कॉर्बिन के उस फैसले का बचाव किया जिसमें दूसरे जनमत संग्रह के दौरान तटस्थ रहने की बात कही गई है। उन्होंने कहा, हमारे नेता देश को एकसाथ लाने के लिए दृढ़संकल्पित हैं, लेकिन इसका इस्तेमाल वोटों के लिए नहीं होना चाहिए। इसके जवाब में लिबरल डेमोक्रेट्स नेता जो स्विनसन ने कहा कि इस मुद्दे पर तटस्थ होना दिखाता है कि कॉर्बिन नेता नहीं हैं।

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