राहुल बताएं कि उनके नाना नेहरू और कांग्रेस को देश को माफ करना चाहिए?

बीजेपी नेता गोविंद मालू ने पूछा सवाल

राहुल गाँधी को मोदीजी और गोड़से के विचार में साम्यता लगती है,यही सोच गाँधीवाद से कॉंग्रेस के दूर होने का पर्याप्त आधार है।गाँधी के विचार आदर्श और कल्पना को जो गुजरात से लगाकर दिल्ली तक मोदीजी ने जिया, जमीन पर उतारा उतना काँग्रेस आजादी के बाद आज तक नहीं कर पाई।
सादगी, मितव्ययिता, स्वच्छता, अंत्योदय, ग्राम स्वराज-विकास, खादी, ग्रामोद्योग, सुरक्षा,भ्रष्टाचार मुक्त शासन, सर्वोदय को लेकर भाजपा और मोदी जी नें ही काम किया।गाँधी जी को तो काँग्रेस चौराहे पर ले आई और गाँधीवाद के विचार के बजाय दूसरे वादों, विदेशी विचारों के साथ समझौता करने लगी,भारतीय विचार की अंत्येष्टि करने की जिम्मेदारी काँग्रेस की है।
गाँधी हत्या को लेकर कोर्ट के फैसले के बाद भाजपा को उससे जोड़ने का अपराध काँग्रेस लगातार करती रही, लेकिन गाँधी हत्या के लिए क्या राहुल के नाना नेहरू की लापरवाही जिम्मेदार नहीं थी ? आज भी यह प्रश्न इतिहास में जवाब खोज रहा है।
गोड़से का महिमा मण्डन तो कॉंग्रेस कर रही है, जबकि गोड़से को तो सजा मिल चुकी है, न्यायालय नें हत्या पर विस्तार से फैसला देकर कौन दोषी और कौन नहीं यह लिख दिया। फिर आज उनके नाम के उल्लेख का क्या औचित्य ? क्या भारत वासियों को इस बात का जवाब नहीं मिलना चाहिए कि नेहरू सरकार को गाँधी जी की जान को खतरे की खुफिया जानकारी होने के बाद उन्होंने कोई सुरक्षा के समुचित उपाय क्यों नहीं किये ?
जब मोदीजी ने कभी भी,कँही भी गोड़से में यक़ीन होने की बात कभी की नहीं तो फिर राहुल क्यों पूछ रहे हैं कि मोदी कहकर दिखाएँ कि गोड़से में उनका यकीन नहीं।
क्या यह भी सच नहीं कि अपनी हत्या के दो दिन पहले गाँधी जी ने काँग्रेस का विसर्जन कर लोक सेवक संघ बनाने और राजनीति करने के लिए काँग्रेस का उपयोग ना कर नई पार्टी बनाने की सलाह नहीं दी थी ?
मोदीजी को गोड़से के समकक्ष खड़ा कर,और वोट बैंक के लिए नागरीकता पर बगैर संशोधित कानून को पढ़ें भड़काने का राजद्रोह कर रहें हैं । राहुल असली मुद्दों से और देश के विभाजन और खण्डित करने की उनकी पार्टी के कृत्यों के जवाब देने से जी चुरा रहे हैं।
आज राहुल गाँधी को काँग्रेस और प्रथम प्रधानमंत्री नेहरूजी की देश के साथ कि गई नाइंसाफ़ी का जवाब देना चाहिए। मुद्दे तो बहुत है लेकिन राहुल इनका ही जवाब दें तो ठीक होगा।
सन १९५१ में नेपाल के राजा गिरिभुवन ने नेपाल को भारत में वीलय करने का प्रस्ताव दिया था। चाचा नेहरू ने इन्कार क्यों कर दिया था ?
बलुचिस्तान के नवाब खान ने प०नेहरू को पत्र लिखकर बाकायदा अनुरोध किया था कि बलुचिस्तान को भारत के साथ शामिल करने की कृपा करें.. हम भारत के साथ रहना चाहते हैं। नेहरू ने इन्कार क्यों कर दिया ? नतीजा,पाकिस्तान ने ताकत के बल पर बलुचिस्तान को कब्जा कर लिया। सोचिए कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी हमें।
सन् १९४७ में “ओमान” ने ग्वादर पोर्ट को भारत देश को लेने के लिए दिया था। नेहरू ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया था। नतीजा पाकिस्तान ने उसे ले लिया, फिर चीन को दे दिया। आज चीन हमारे ऊपर डन्डा घुमा रहा है।
सन् १९५० में चाचा नेहरू ने कोको आइलैंड बर्मा (म्यामांर)को दान में दे दिया। जैसे पुरखों की सम्पत्ति है। बर्मा ने चीन को बेच दिया। नतीजा आज चीन हमारे नौसेना की जासूसी करता है।
१९५२ में नेहरू ने पता नहीं किस स्वार्थ में २२३२७ वर्ग किलोमीटर का एरिया बर्मा को दान कर दिया था। इस स्थान का नाम है कावाओ वेली ये कश्मीर के जैसा ही सुंदर और रमणीक स्थल था।बाद में बर्मा ने चीन को यह भी बेच दिया। नतीजा आज चीन वहां से हमारे ऊपर जासूसी करता है और आंखें दिखाता है। सोचिए कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है।
देश की आजादी के तुरंत बाद अमेरिका के राष्ट्रपति ने नेहरू को कहा था कि आप न्युक्लियर पावर का देश बनने के लिए प्लांट लगाए UNO का स्थाई सदस्य बन जाएँगे, नेहरू ने इन्कार कर दिया और चीन को सदस्य बनाया। कितनी बड़ी क्षति हुई है अंदाजा लगाइए ।
सन् ६२ के चीन के साथ युद्ध में भारत के वायुसेना की योजनानुसार युद्ध लड़ने के लिए मना कर दिया और हम युद्ध हारे। चीन को ३७,२४४ वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र प्रधानमंत्री नेहरू ने भेंट स्वरूप सौप दिया,और तर्क यह कि यह तो बंजर भूमि थी इस युद्ध में ३००० से अधिक भारत के जवान शहीद हुए थे। इसी एरिया को अक्साई चीन कहते हैं।
राहुल गाँधी को फिर हर बार रीलांच करने की तैयारी कॉंग्रेस करती रहती है, लेकिन पहले उनका बचकानापन दूर करने,राजनीतिक समझ का प्रशिक्षण दिए बगैर मैदान में उतार देती है और वो हिट विकेट हो जाते हैं।

गोविंद मालू

       (लेखक :मध्यप्रदेश राज्य खनिज विकास निगम के पूर्व उपाध्यक्ष हैं )

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