Nirbhaya case convict Vinay Sharma SC dismisses his plea challenging President decision on mercy petition – निर्भया के गुनहगार विनय शर्मा को झटका, SC ने खारिज की राष्ट्रपति के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका


नई दिल्ली:

निर्भया गैंगरेप-हत्या मामले (Nirbhaya Case) के दोषी विनय कुमार शर्मा (Vinay Kumar Sharma) को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. शीर्ष अदालत ने राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है. जस्टिस आर बानुमति, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस ए एस बोपन्ना की बेंच ने यह फैसला सुनाया. पीठ ने कहा कि हमने सारी फाइलें देखकर ही विचार किया है. यह दलीलें खारिज की जाती हैं कि राष्ट्रपति ने सारे दस्तावेज नहीं देखे. यह भी खारिज किया जाता है कि उप-राज्यपाल ने फाइल पर साइन नहीं किए.

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान विनय शर्मा की मेडिकल रिपोर्ट भी पेश की गई. रिपोर्ट के बारे में बेंच ने कहा कि ताजा रिपोर्ट कहती है कि उसकी शारीरिक और मानसिक हालत ठीक है. बताते चलें कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ram Nath Kovind) दोषी मुकेश सिंह की भी दया याचिका खारिज कर चुके हैं. मुकेश के वकील ने भी सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका दाखिल की थी, जिसे शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया था. इसी के साथ मुकेश सिंह और विनय शर्मा के फांसी से बचने के सभी कानूनी विकल्प समाप्त हो चुके हैं.

Nirbhaya Case: सुनवाई के दौरान रो पड़ीं निर्भया की मां, जज से बोलीं- हमेशा दोषियों को सुना जाता है हमें नहीं

बताते चलें कि निर्भया मामले में डेथ वारंट जारी करने की मांग वाली अर्जी पर सुनवाई 17 फरवरी तक के लिए टल गई है. पटियाला कोर्ट ने इस मामले के दोषी पवन को वकील मुहैया कराया है. कोर्ट ने कहा कि दोषी के मौलिक अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती है. अदालत द्वारा सुनवाई टाले जाने पर निर्भया की मां कोर्ट परिसर में ही रो पड़ीं, उन्होंने कहा, ‘मैं भरोसा लेकर आती हूं फिर निराश होकर जाती हूं. इंसाफ के लिए मैं कई सालों से अदालत के चक्कर लगा रही हूं. आज कुछ फैसला करें.’ इसपर जज ने कहा कि नियम के हिसाब से दोषी को वकील देना होगा. हम सभी को कानूनी प्रक्रियाओं का सम्मान करना चाहिए.

निर्भया केस : चारों दोषियों की फांसी टलने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के हिसाब से दया याचिका खारिज होने के बाद दोषी को 14 दिनों का वक्त दिया जाता है. 1 फरवरी से पहले निर्भया के दोषियों को 22 जनवरी को फांसी दी जानी थी, जो टल गई थी. दिल्ली जेल नियमों के अनुसार एक ही अपराध के चारों दोषियों में से किसी को भी तब तक फांसी पर नहीं लटकाया जा सकता जब तक कि अंतिम दोषी दया याचिका सहित सभी कानूनी विकल्प नहीं आजमा लेता.

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